६ दिसम्बर १९९२ को जब बाबरी मस्जिद गिराई गयी तब देश मैं एक तूफ़ान सा आया न जाने कितनी माताओं की गो़द सूनी हो गई । न जाने कितनी स्त्रियों का सुहाग लुट गया । धर्म के नाम पर हिन्दू और मुसलमानों को खूब लड़ाया गया । हमेशा के लिए एक खाई खोद दी गई। आज भी उस खाई को बनाए रखने के लिए ६ दिसम्बर को शौर्य दिवस और कलंक दिवस मनाये जाते है। धर्म जानने का दावा करने वाले धर्म के विराट स्वरुप को जानना एक बड़ी बात है । यह अभी अपने को ही नही जानते । हम कौन हैं। हमारा सम्बन्ध कहा से है? वह सम्बन्धी कौन है? क्या वह अनेक रूपों में है । वो क्या एक नही है? यही है मर्म । वो एक होते हुए भी अनेक रूपों मे दीखता है और वह भी अनेक रूपों में दीखते हुए एक है। उसी के होने पर हम है और उसके न होने पर हम शव है।
शिवा हम, शिव ही हम हैं और हम ही शिव हैं।
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